
*भुज कच्छ के भीडनाका बाहर न्यू रेलवे स्टेशन रोड पर नशे में वाहन चालकों का आतंक*
(अहेवाल – धरकास मोखा)
भुज शहर का भीडनाका बाहर स्थित न्यू रेलवे स्टेशन रोड आज गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा संकट का प्रतीक बनता जा रहा है। यह सड़क शहर की अत्यंत व्यस्त सड़कों में से एक है, जहाँ रेलवे स्टेशन से आने-जाने वाले यात्री, स्थानीय नागरिक, महिलाएँ, बुज़ुर्ग और बच्चे दिन-रात आवाजाही करते हैं। इसके बावजूद इस मार्ग पर नशे में धुत होकर वाहन चलाने की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।
विशेष रूप से रात्रि समय में स्थिति और अधिक चिंताजनक हो जाती है। शराब या अन्य नशीले पदार्थों के प्रभाव में वाहन चालक तेज़ रफ्तार से वाहन दौड़ाते देखे जाते हैं, जिससे सड़क किसी रेस ट्रैक में तब्दील हो जाती है। इससे कभी भी बड़ी दुर्घटना घटित होने की आशंका बनी रहती है।
पूर्व में इस मार्ग पर स्पीड ब्रेकर लगाए गए थे, जिससे वाहन की गति नियंत्रित रहती थी। लेकिन स्पीड ब्रेकर हटाए जाने के बाद तेज़ रफ्तार और लापरवाही में वृद्धि हुई है। सवाल यह उठता है कि स्पीड ब्रेकर हटाने के बाद वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
नियमित पुलिस पेट्रोलिंग, नशा जांच अभियान और यातायात नियंत्रण की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। यदि यह मार्ग इतना संवेदनशील है, तो यहाँ स्थायी निगरानी, नियमित चेकिंग और सख्त कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती?
अक्सर देखा जाता है कि प्रशासन दुर्घटना होने के बाद ही सक्रिय होता है। लेकिन प्रश्न यह है कि यदि किसी बड़ी जान-माल की हानि हो जाती है, तो उसकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी किसकी होगी?
सार्वजनिक सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, नियमित चेक पोस्ट, प्रभावी पेट्रोलिंग, स्पीड कंट्रोल के उपाय और जनजागरूकता अभियान अब समय की अनिवार्य आवश्यकता बन चुके हैं।
भीडनाका बाहर न्यू रेलवे स्टेशन रोड पर यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में किसी गंभीर हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन को चाहिए कि वह चेतने से पहले ही कार्रवाई करे, ताकि आम नागरिक सुरक्षित और भयमुक्त होकर आवागमन कर सकें।












